

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) कार्यालय द्वारा 10 अगस्त 2026 को जारी एक आदेश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एनएसयूआई प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने आदेश पर आपत्ति जताते हुए कुलपति के नाम शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
रंजेश सिंह का आरोप है कि विश्वविद्यालय के NSS कार्यालय की ओर से विभिन्न महाविद्यालयों को 12 अगस्त को आयोजित होने वाली तिरंगा यात्रा में निर्धारित संख्या में छात्र-छात्राओं और NSS स्वयंसेवकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या तय कर उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दबाव डालना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति किसी आदेश या दबाव का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की स्वेच्छा और भावना से जुड़ी होती है। किसी विद्यार्थी को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी कार्यक्रम में शामिल करना उसकी स्वतंत्रता का उल्लंघन है। रंजेश सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय और NSS जैसी शैक्षणिक संस्थाओं को किसी राजनीतिक दल या पार्टी विशेष के कार्यक्रम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि 10 अगस्त को जारी आदेश का पत्र क्रमांक सार्वजनिक किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि आदेश किस शासकीय या प्रशासनिक पत्र अथवा निर्देश के आधार पर जारी किया गया है और 12 अगस्त को होने वाली तिरंगा यात्रा का वास्तविक आयोजक कौन है—विश्वविद्यालय, शासन-प्रशासन या कोई राजनीतिक संगठन।
रंजेश सिंह ने कहा कि यदि तिरंगा यात्रा किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम है और NSS अथवा महाविद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को निर्धारित संख्या में शामिल होने के लिए बाध्य किया जा रहा है, तो एनएसयूआई इसका पुरजोर विरोध करेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को राजनीतिक कार्यक्रम में जाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। देशभक्ति प्रदर्शित करने के कई तरीके हैं, लेकिन विद्यार्थियों की इच्छा और स्वतंत्रता को दरकिनार कर उन्हें किसी कार्यक्रम में भेजना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसी बीच, एनएसयूआई ने NSS प्रभारी डॉ. मनोज सिन्हा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में उनके द्वारा कथित तौर पर कार्यक्रम के संबंध में यह कहते हुए नजर आने का उल्लेख किया गया है कि “विधायक जी ने आदेश दिया है।” एनएसयूआई ने इस कथन की भी जांच कराने की मांग की है।
रंजेश सिंह ने कुलपति से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि आदेश किसके निर्देश पर जारी हुआ और विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित करने का आधार क्या था। साथ ही, NSS प्रभारी डॉ. मनोज सिन्हा की भूमिका की भी जांच कर शिकायत सही पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश की समीक्षा नहीं की और विद्यार्थियों को निर्धारित संख्या में शामिल करने के निर्देश के पीछे के आधार को स्पष्ट नहीं किया, तो एनएसयूआई चरणबद्ध आंदोलन करेगी। यदि जांच में किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बाध्य किए जाने की पुष्टि होती है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ व्यापक विरोध किया जाएगा।
रंजेश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की गरिमा और विद्यार्थियों की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में होने वाले आंदोलन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पुष्पराज साहू, करन यादव, राजा खान, प्रशांत पाल, आशीष यादव और मनेन्द्र अनंत मौजूद रहे।





