
• प्रस्तुत प्रमाणों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी।
• करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं से शासन और श्रम विभाग को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप।

बिलासपुर। एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने श्रमायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए श्रमिकों की मृत्यु के बाद दी जाने वाली सहायता राशि के मामलों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि श्रम विभाग द्वारा संचालित मृत्यु सहायता योजना के कई प्रकरणों में नियमों की अनदेखी किए जाने के संकेत मिले हैं। शिकायत के अनुसार, कुछ मामलों में आत्महत्या से हुई मौत को सामान्य मृत्यु बताकर सहायता राशि का दावा प्रस्तुत किया गया, जबकि अन्य प्रकरणों में मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर शासकीय योजनाओं का अनुचित लाभ लेने का प्रयास किया गया। इन आरोपों के चलते शासन को आर्थिक क्षति पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।
यह कृत्य न केवल शासन एवं श्रम विभाग को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने वाला है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों के अधिकारो के साथ भी अन्याय है।
उपलब्ध दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रथम दृष्टया गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं विभागीय मिलीभगत की ओर संकेत करते हैं।
ज्ञापन के माध्यम से श्रमायुक्त से सभी संबंधित प्रकरणों के दस्तावेज, मृत्यु प्रमाण-पत्रों तथा स्वीकृत सहायता दावों का सत्यापन कराते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही आरोपों में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध तत्काल विभागीय और वैधानिक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
एनएसयूआई के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो श्रमिकों के हितों और जनहित को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग कार्यालय का घेराव कर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी। साथ ही उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर शिकायत के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज एवं अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने की भी बात कही।






